सिविल सेवा की तैयारी का आधार कहां रखा जाये
इसकी शुरूआत कैसे हो मेरा मानना है कि पूर्ण अभिव्यक्ति के साथ इसकी तैयारी हो यानि "विचार अभिव्यक्त एवं विश्वास" की प्रस्तावना की भाषा को तैयारी का आधार बनाया जाये
अध्यापक व छात्र के बीच जो दूरी है वह कम नहीं वह समकक्ष हो और चर्चा को विशेष महत्व देना चाहिए। जिससे चयन की अंतिम प्रक्रिया इंटरव्यू को टारगेट करके अध्ययन करना चाहिए।
ऐसा करने से
a.अध्ययन के साथ ही तर्क का विकास
एवं
bतीव्रता के साथ उत्तर देने का गुण होना अति आवश्यक है।
जिससे आप में एक बार में याद करने की क्षमता के साथ उसे स्मरण रखने की भी सदैव क्षमता का विकास होना चाहिए।
केवल पढाने या पढने का रूढवादी ढाँचा सफलता में सदैव बाधक रहा है।
इस प्रक्रिया में देखा गया है कि अपने अध्ययन काल में सामान्य सा रहने वाला छात्र परीक्षा को काफी आसानी से निकल लेता है जबकि विशेष सुविधओं से युक्ति एवं तीव्र बुद्धि वाला कई मायनो में धोखा खा जाता है तब तक उसके पास अवसर निकल जाने और हाथ मलते रहने के सिवाय कुछ नहीं बचता है।
इस क्रम में जब से शुरूआत कर दी जाये तब से जल्दी ही कहा जायेगा।
इसकी शुरूआत कैसे हो मेरा मानना है कि पूर्ण अभिव्यक्ति के साथ इसकी तैयारी हो यानि "विचार अभिव्यक्त एवं विश्वास" की प्रस्तावना की भाषा को तैयारी का आधार बनाया जाये
अध्यापक व छात्र के बीच जो दूरी है वह कम नहीं वह समकक्ष हो और चर्चा को विशेष महत्व देना चाहिए। जिससे चयन की अंतिम प्रक्रिया इंटरव्यू को टारगेट करके अध्ययन करना चाहिए।
ऐसा करने से
a.अध्ययन के साथ ही तर्क का विकास
एवं
bतीव्रता के साथ उत्तर देने का गुण होना अति आवश्यक है।
जिससे आप में एक बार में याद करने की क्षमता के साथ उसे स्मरण रखने की भी सदैव क्षमता का विकास होना चाहिए।
केवल पढाने या पढने का रूढवादी ढाँचा सफलता में सदैव बाधक रहा है।
इस प्रक्रिया में देखा गया है कि अपने अध्ययन काल में सामान्य सा रहने वाला छात्र परीक्षा को काफी आसानी से निकल लेता है जबकि विशेष सुविधओं से युक्ति एवं तीव्र बुद्धि वाला कई मायनो में धोखा खा जाता है तब तक उसके पास अवसर निकल जाने और हाथ मलते रहने के सिवाय कुछ नहीं बचता है।
इस क्रम में जब से शुरूआत कर दी जाये तब से जल्दी ही कहा जायेगा।
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